Saturday, 11 January 2014

नागरिक अधिकार मंच से जुड़कर कार्य करने वाले मित्रों आप निम्नांकित पदाधिकारियों से बात करके कार्य कर सकते हैं I बिहार के प्रत्येक जिला में नागरिक अधिकार मंच कार्यरत है I देश के कई राज्यो में राज्य संयोजक /प्रांतीय संयोजक कार्यरत हैं I हमसे जुड़ने वाले इक्षुक साथी हमें nagrikadhikarmanchbihar@gmail.com , rkchaubey99@gmail.com ,rameshmalahi@gmail.com पर अपना पूर्ण बायोडाटा और अपना फ़ोटो मेल कर सकते हैं I हमारी किसी भी तरह की सदस्यता शुल्क नहीं है I पूर्णतः वैचारिक सोशिओ पोलिटिकल फ्रंट के रूप में नागरिक अधिकार मंच कार्यरत है I
Ramesh Kumar Choubey
General Secretary
NAGRIK ADHIKAR MANCH
2/22 Madhuban Awas Board Complex
Lohia Nagar Kankarbagh, Patna
Bihar, Pincode :- 800020
Mob. +919472312029,+918435023029
Email.: rkchaubey99@gmail.com

Narendra Singh
Socio Political Adviser
NAGRIK ADHIKAR MANCH
Vill.+Post - Banboi
Buland Sahar, Uttarpradesh
Pincode :- 245408
Mob.+919012432074
Email.: nanendrakumarsingh39@gmail.com

Bharat Singh
Co ordinator
NAGRIK ADHIKAR MANCH
Shakti Sadan ,Madan Ji Ka Hata
Ara ,Bhojpur ,Bihar
PinCode 802301
Mob :- +919308591217
bharatsingh5@gmail.com
नागरिक अधिकार मंच और हमारे द्वारा निर्मित फेसबुक ग्रुप्स I अपनी गतिविधियों के द्वारा हम कुछ करने में विश्वास रखते हैं I
Voice Of Korba,Chhattisgarh
https://www.facebook.com/groups/lsmdelhi/

ज्ञान तत्व
https://www.facebook.com/groups/393216677381571/

SAMADHAN
https://www.facebook.com/groups/235888913211252/

Janta Malik Hai (जनता मालीक है)
https://www.facebook.com/groups/126595410831296/

Nagrik Adhikar Manch
https://www.facebook.com/groups/nagrikadhikarmanch/

लोक स्वराज मंच
https://www.facebook.com/groups/121248074691254/

"All India R.T.I Activist Association"
https://www.facebook.com/groups/339557682791133/

"Bihar Against Nitish Kumar"
https://www.facebook.com/groups/rkchaubey51/

Gram Sabha Sasaktikaran Abhiyan
https://www.facebook.com/groups/308678065891199/

Lok Sansad { लोक संसद }
https://www.facebook.com/groups/270928689705872/

राष्ट्र गौरव विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर)
https://www.facebook.com/groups/347932908678597/

चलो गांव की और
https://www.facebook.com/groups/110147289179861/

मतदाता जागरूकता अभियान
https://www.facebook.com/groups/149721175238087/

भोजपुरी संघर्ष समिति
https://www.facebook.com/groups/349971068417559/

अप्रवासी बिहारी संघ
https://www.facebook.com/groups/260931847356952/

"श्री त्रिदंडी स्वामी केंद्रीय विश्वविद्यालय संघर्ष समिति "
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Lok Swaraj Manch
https://www.facebook.com/groups/lokswarajmanch/

vyavsthapak {व्यवस्थापक }
https://www.facebook.com/groups/298386646954444/

भारतीय मतदाता मंच
https://www.facebook.com/groups/172188979640682/

पं जवाहर लाल नेहरु : एक अदूरदर्शी राजनीतिज्ञ
https://www.facebook.com/groups/166310546884958/

Bihar Me Susasan Ka Sach
https://www.facebook.com/groups/289764201070662/

श्रम शोषण मुक्ति अभियान
https://www.facebook.com/groups/217290735063259/

छत्तीसगढ़ शासन भ्रष्टाचार विकास प्राधिकरण
https://www.facebook.com/groups/348314348590016/

voice of chhattisgarh (छत्तीसगढ़ की आवाज )
https://www.facebook.com/groups/384345841670965/

प्रजातंत्र प्रहरी
https://www.facebook.com/groups/465882670139412/

सरगुजा की आवाज
https://www.facebook.com/groups/615422958470246/

बिहार के लौह पुरुष रमेश कुमार चौबे
https://www.facebook.com/groups/409513665789772/

कॉंग्रेस की भारत निर्माण पर हमें शक है
https://www.facebook.com/groups/409513665789772/

samadhan {समाधान }
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लोक संविधान सभा
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प्रधानमंत्री की कुर्सी किसी की खानदानी जागीर नहीं
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vyavastha parivartan manch
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सत्ता नहीं व्यवस्था परिवर्तन के लिए सम्पूर्ण क्रांति
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voice of Delhi (दिल्ली की आवाज )
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पूर्वांचल आंदोलन परिषद्
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डॉ .श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक दूरदर्शी राजनीतिक चिंतक
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अजन्मा अभिशाप
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voice of Bihar (बिहार की आवाज )
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ऐसा देश हो मेरा
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बिहार में है भ्रष्टाचार -संरक्षक हैं नितीश कुमार
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बिहार भ्रष्टाचार विकास प्राधिकरण
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नितीश कुमार का नालंदा प्रेम पूरा बिहार उपेक्षित गेम
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जातिवाद और क्षेत्र वाद के पोषक नितीश कुमार
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कला संगम
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नितीश कुमार के चक्कर में शरद पड़े घन चक्कर में
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बिहार के विनाश पुरुष नितीश कुमार
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आदर्श लोकतान्त्रिक व्यवस्था का विधान
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"Bihar Me Nitish Sasan Me Bhrastachar Ki Sunami"
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" Media+Mafiya+Karporate Gathbandhan K Changul Me Bihar"
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बजरंग मुनि
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हाँथ में तीर अब हरण होगा बिहारियों का चिर
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मुनि मंथन
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Unlike ·  · Promote · 
आम आदमी पार्टी का टोपी पहनने से पहले जरा सोंच तो लीजिये जनाब I
"किसी को टोपी पहनाना "
मतलब --किसी को बेफकूफ बनाना होता है I 
क्या कमाल है ? 
ये अरविन्द देश की आम जनता को बेवकूफ बना रहे हैं अपनी पार्टी का टोपी पहनकर I 
जनता को चाहिए स्वराज लेकिन केजरीवाल निकल गए दगाबाज I
अगर आप नेता बनने की सोच रहें हैं तो आपको टोपी पहनना और पहनाना दोनो आना चाहिए।
अगर आप नेता बनने की सोच रहें हैं तो आपको टोपी पहनना और पहनाना दोनो आना चाहिए।
सोनिया गाँधी के के सपने में आये गाँधी जी ! 
बोले मेरी लाठी चश्मा और टोपी कहा है जो में कांग्रेस को दे गया था ! 


सोनिया बोली टोपी तो दे दी राहुल को पूरे देश को पहनाने के लिए , 
चश्मा दे दिया मनमोहन को कुछ न देख पाने के लिए , 
और लाठी दे दी पुलिस को बाबा रामदेव जैसो के सर पर घुमाने के लिए 
मैँ नहीँ बोलता था कि मनमोहन 
जी को बोलने के लिए मत उकसाओ ?
अब देख लो मनमोहन जी के बोलने 
का परिणाम. 15 अगस्त को एक 
घँटा भाषण. 
और.... 
1. सेँसेक्स 1400 गिरा. 
2. सोना 34000 पार. 
3. डालर 65 पार. 
4. प्याज 80 पार. 
5. घोटाले की 157 फाइलेँ पार.
अब समझ आया कि मनमोहन जी ने
क्यूँ बोला था "हजारोँ जवाबोँ से
मेरी खामोशी अच्छी".
#मनमोहन_की_काली_जुबान
क्यां अजीब संयोग है - 
युपी मे लैपटॉप बांटे अखिलेश ने,,,,,,,, 
लैपटॉप पर लोग देख रहे # मोदीजी को...............
यहाँ शहीदों की पावन गाथाओं को अपमान मिला 
डाकू ने खादी पहनी तो संसद में सम्मान मिला 
ऐरे गैरे नत्थू खैरे लोकतंत्र में नेता बनकर बैठे हैं 
जिनको जेलों में होना था वो मंत्री बनकर बैठे हैं
सोंचता हूँ की वो कितने मासूम थे ,क्या से क्या हो गए देखते देखते I 
मैंने पत्थर से जिनको बनाया सनम ,वो खुद हो गए देखते देखते II
जाने वाले हमारे महफ़िल से चाँद तारों को साथ लेता जा I 
हम खिंजा से निबाह कर लेंगे तू बहारों को साथ लेता जा II
महफ़िल में बार बार किसी पर नजर गई ,हमने बचाई लाख मगर फिर उधर गई I 
उनकी नजर में कोई तो जादू जरुर है ,जिस पर पड़ी उसी के जिगर तक उतर गई II
राष्ट्र को अभी नरेंद्र मोदी की जरुरत है I अलगाववादी ताकतों और सांप्रदायिक शक्तियों से सख्ती से निपटने के लिए उनका समूल नाश करने के लिए मज़बूरी में हीं सही देश के लिए नरेंद्र मोदी जरुरी बन गए हैं I 
हालाँकि मेरे विचार से मोदी सरीखे व्यक्तित्व को देश का गृह मंत्री बनाया जाना चाहिए और उसे पूरी तरह से अपने तरीके से कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए I 
प्रधानमंत्री को अधिकतम लोकतान्त्रिक और गृह मंत्री को तानाशाह राष्ट्रनिष्ठ होना चाहिए I
सोनियाँ गांधी जी ने पुत्र मोह में श्री प्रणव मुखर्जी जी को राष्ट्रपति बनाकर कांग्रेस पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति पहुंचा दी है I आज अगर राहुल गांधी के बदले श्री प्रणव मुखर्जी को कांग्रेस की तरफ से 2014 लोक सभा चुनाव के लिए देश का प्रधानमंत्री प्रत्याशी घोषित कर दिया गया रहता तो तस्वीर कुछ और हीं होती I
स्वर्गीय प्रमोद महाजन में भारत का प्रधानमंत्री बनने की पूरी क्षमता और दक्षता दोनों थी I 
परन्तु रास्ता से हटाने के लिए षड़यंत्र पूर्वक उनके हीं संगे भाई को बहकाकर उनकी हत्या करवा दी गई I 
कौन, किसका यह षड़यंत्र था इसपर तफसीस तो हुई नहीं जाँच की दिशा दूसरी तरफ मोड़ दी गई I 
श्री अटल बिहारी बाजपेयी के बाद अगर कोई भाजपा में सबके लिए स्वीकार्य नेतृत्व था तो वो मात्र स्वर्गीय प्रमोद महाजन हीं थे I 
अगर स्वर्गीय प्रमोद महाजन जीवित रहते तो श्री मनमोहन सिंह जी को दूसरा चांस नहीं मिलता बल्कि वर्ष 2009 में हीं प्रमोद महाजन भाजपा के प्रधानमंत्री बन गए होते I
पूर्व राष्ट्रपति डॉ .ए.पी जे अब्दुल कलाम स्वर्गीय प्रमोद महाजन के हीं खोज थे I 
स्वर्गीय प्रमोद ने हीं डॉ .ए.पी जे अब्दुल कलाम साहब के नाम को राष्ट्रपति के लिए सबसे पहले प्रस्तावित किया था I
विस्थापन का दर्द: वास्तविक या कृत्रिम ।
मुज्जप्फर नगर दंगों के बाद बडी संख्या मे मुसलमानों का पलायन हुआ और वे निकटवर्ती शांत क्षेत्रों मे तात्कालिक रूप से रहने लगे। ऐसे लोगों की हालत दयनीय थी। उनकी स्थिति को देखकर मन करूणा से भर जाता था, यहाँ तक कि तटस्थ हिन्दुओं का भी। ऐसे पलायन कर चुके कुछ लोगों मे से, कुछ लोग अपने-अपने घरों मे वापस चले गये। यद्यपि उन्हें वापस जाने मे भी डर लग रहा था, लेकिन वे कुछ खतरा उठाकर भी अपने-अपने घरों को लौट गये। उत्तरप्रदेश की अखिलेश सरकार ने भी उन्हें वापस जाने मे मदद की यहाँ तक कि वापस जाने वाले परिवारों को पाँच पाँच लाख तक की आर्थिक सहायता भी दी गई। फिर भी कुछ लोग कैम्पों मे रूके रह गये। यहाँ तक कि कुछ लोग तो पाँच लाख रूपया सहायता लेने के बाद भी वापस नही गये और कुछ लोग आज तक वापस जाने को तैयार नही है।
प्रारंम्भिक काल मे कैंम्पों मे पेशेवर सांम्प्रदायिक राष्ट्र विरोधी तत्वों का समावेश नही था। धीरे-धीरे इन कैंम्पों मे ऐसे तत्वों का समावेश होता गया तथा बचे हुए लोगों मे से अनेक ने इस घटना को एक व्यवसाय मानकर राज्य सरकार का अधिकतम शोषण करने का प्रयास शुरू किया। ऐसे तत्व एक ओर तो भय का नाटक करते थे, दूसरी ओर अधिक से अधिक करूणा के दृष्य दिखाने का भी नाटक करते थे। तीसरी ओर इनके एजेंट मीडिया के माध्यम से उत्तरप्रदेश सरकार या भारत सरकार पर भी ऐसा दबाव बनाते थे जैसे कि कैंम्प मे बचे लोगों को बहुत ही अमानवीय स्थिति मे रहना पड रहा है। अखिलेश सरकार ने बहुत हिम्मत करके ऐसे कैंम्पों को बन्द करने का प्रयास किया। इसका लाभ अन्य राजनैतिक दलों ने भी बहुत उठाया और अब भी कुछ लोग अपने कैंम्पों मे बचे हुए हैं। स्पष्ट दिखता है कि जो लोग वापस हुए है, उनसे किसी के साथ कोई दुर्घटना नही हुई है। फिर भी या तो ये लोग जाना नही चाहते हैं या पेशेवर राजनेता अपने राजनैतिक लाभ के लिए उन्हें रोककर रखना चाहतें हैं।
विस्थापन अथवा पलायन की ऐसी ही घटना कश्मीर मे भी हो चुकी है। वहाँ से भी बडी संख्या मे कश्मीरी पंडित पलायित होकर या तो जम्मू चले गये अथवा भारत के अन्य शहरों मे बस गये। कश्मीर मे भी लगभग वैसा ही हुआ, जब ऐसे विस्थापित कश्मीरी पंडितों मे से कुछ संख्या मे पंडित अपने घरों को चले गये और मुज्जप्फर नगर सरीखे ही कुछ लोग कैंम्पों मे रह गये। सरकार से सुविधाएं भी लेते रहे और अन्य सुविधाओं की माँग भी करते रहे। आज तक काफी संख्या मे कश्मीरी पंडित कश्मीर छोडकर अन्य जगहों पर रह रहें हैं और जिस तरह मुज्जप्फर नगर मे मुस्लिम सांम्प्रदायिक तत्व अर्थात बसपा-कॉंग्रेस तथा कुछ अन्य लोग जिनमें मीडिया कर्मी भी शामिल हैं, वहाँ की सरकार को बदनाम करने के लिए नमूने के तौर पर ऐसे लोगों को प्रतीक स्वरूप रखे हुए हैं। उसी तरह कश्मीर मे भी कश्मीर पंडितों को वापस जाने से रूकने को सांम्प्रदायिक हिन्दू विशेषकर संघ-भाजपा के लोग हथियार के तौर पर उपयोग कर रहें हैं।
फिर भी यदि गहराई से सोचा जाए तो ये दोनो समस्याएँ लगभग समान होने के बाद भी कुछ भिन्न हैं। मुज्जप्फर नगर मे जो पलायन हुआ उसका कारण सांम्प्रदायिक हिन्दुओं का मुसलमानों पर कोई अत्याचार नही था, बल्कि सांम्प्रदायिक मुसलमानों का बढा हुआ मनोबल था। क्योंकि वहाँ शक्ति प्रदर्शन की पहल सांम्प्रदायिक मुसलमानों ने ही की थी। यद्यपि इसका परिणाम वहाँ के शांति प्रिय मुसलमानों को झेलना पडा। दूसरी ओर कश्मीरी पंडितों का पलायन भी सांम्प्रदायिक मुसलमानों द्वारा अपने शक्ति प्रदर्शन के रूप मे तथा कश्मीर को हिन्दुओं से खाली कराने के उदेश्य से पैदा हुआ। दोनों के परिणाम भले ही एक समान हुए जिसमें शांति प्रिय हिन्दू और शांति प्रिय मुसलमानों को भोगना पडा, किन्तु दोनो घटनाओं के कारण सांम्प्रदायिक मुसलमान ही थे। यदयपि दोनो घटनाओं से लाभ सांम्प्रदायिक हिन्दुओं को ही हुआ। कश्मीरी पंडित चाहे जिस दशा मे रह रहें हों, जितने परेशान हों, किन्तु उनका लाभ सांम्प्रदायिक हिन्दू संगठनों को मिल रहा है। मुज्जप्फर नगर मे हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच राजनैतिक धु्रवीकरण हुआ और उसका लाभ अलग-अलग राजनैतिक दलों के लोग उठा-उठा कर प्रसन्न हो रहें हैं।
यदि गंभीरता से सोचा जाए तो स्वतंत्रता के बाद भारत मे लगातार सांम्प्रदायिकता का विस्तार हुआ है। इसकी शुरूवात स्वतंत्रता के शीघ्र बाद नेहरू और पटेल के बीच विचार भिन्नता के रूप मे देखना चाहिए। गांधी हत्या एक शुद्ध सांम्प्रदायिक घटना थी, जिसके पीछे हिन्दू-राष्ट्र की भावना काम कर रही थी। भले ही इस हत्या से संघ का कोई सीधा संबंध नही था, किन्तु इस भावना से संघ का निरंतर संबंध था और वह संबंध आज तक बना हुआ है। सरदार पटेल एक ईमानदार राष्ट्रवादी नेता थे, जो हिन्दुओं की ओर आंशिक रूप से झुके हुए थे। दूसरी ओर पंडित नेहरू एक समाजवादी विचारों के पोषक थे जो आंशिक रूप से मुसलमानों की ओर झुके हुए थे। भारत की राजनैतिक व्यवस्था मे इन दोनो के अतिरिक्त एक तीसरे व्यक्ति भीमराव अंम्बेडकर थे, जो भले ही जातीयता के आधार पर हिन्दुओं से घृणा करते हों, किन्तु सांम्प्रदायिक आधार पर वे हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच मे समान भाव रखते थे। सरदार पटेल और पंडित नेहरू के अलग-अलग अनेक उल्लेखनीय कार्य अब तक याद कियें जाते हैं, किन्तु सांम्प्रदायिकता के आधार पर दोनो ही एक समस्या के रूप मे थे और आज तक हैं। गांधी हत्या के बाद सच्चाई यह है कि हिन्दू सांम्प्रदायिकता को पूरी ताकत से कुचल देना चाहिए था। पटेल जी ने प्रारंभ मे तो लोक-लाज से ऐसा कदम उठाया भी किन्तु शीघ्र ही संघ परिवार द्वारा स्वयं को सांस्कृतिक गतिविधियों तक सीमित रखने का झूठा आश्वासन पाकर विश्वास कर लिया और उन्हें सब प्रकार की छूट दे दी। संघ परिवार कितना सांस्कृतिक सीमाओं मे हैं यह बात किसी से छिपी नही है। दूसरी ओर पंडित नेहरू ने सांम्प्रदायिक हिन्दुओं को कुचलने की अपेक्षा सांम्प्रदायिक-मुसलमानों को प्रोत्साहन दिया जिससे कि बैंलेंस बना रहे। सब जानतें हैं कि स्वतंत्रता के पहले जब भारत का विभाजननिश्चित नही हुआ था, उस समय विभाजन को टालने के लिए मुसलमानों को अल्पसंख्यक संरक्षण देने की बात कही गई थी। जब इस संरक्षण से संतुष्ट न होकर मुसलमानों ने पाकिस्तान ले लिया, भारत का विभाजन हो गया, इसके बाद भी अल्प-संख्यक शब्द संविधान से नही हटाया गया। यहाँ तक कि चापेकर बंधुओं ने संविधान बनाते समय यह प्रश्न उठाया भी तो पंडित नेहरू ने कडे होकर उनको रोक दिया। यदि उस समय हिन्दू-राष्ट्र और अल्प-संख्यक संरक्षण जैसे मुद्दों को हटाकर सरदार पटेल और पंडित नेहरू समान नागरिक संहिता के पक्ष मे हो गये होते तो भारत से सांम्प्रदायिकता का यह कोढ मिट गया होता। मुझे विश्वास है कि समान नागरिक संहिता के पक्ष मे भीमराव अंम्बेडकर भी मान जाते। गांधी हत्या के बाद हिन्दू सांम्प्रदायिकता के प्रति नरम रूख रखने वाले सरदार पटेल और उसकी भरपाई के लिए मुस्लिम सांम्प्रदायिकता को संरक्षण देने वाले पंडित नेहरू, कश्मीर या कश्मीरी पंडितों और मुज्जप्फर नगर दंगों में पलायन करने पाले शांति प्रिय मुसलमानों के कष्टों के लिए दोषी हैं।
पंडित नेहरू समाजवाद के पोषक थे, किन्तु आश्चर्य है कि वे कभी समाजवाद का अर्थ समझे ही नही। समाजवाद का अर्थ होता है समाज सशक्तिररण और जिसका धरातल पर अर्थ होता है परिवार, गांव , जिले को अधिकतम संवैधानिक अधिकार देना। पंडित नेहरू ने समाजवाद का अर्थ किया राष्ट्रीयकरण अर्थात राज्य सशक्तिकरण और जिसका धरातल पर अर्थ हुआ परिवार गाँव , जिले के सारे अधिकार छीनकर राज्य के पास केन्द्रित करना। दूसरी ओर सरदार पटेल ने भी राष्टवाद का अर्थ नही समझा। राष्टवाद का अर्थ होता है राष्ट की प्रभुसत्ता को समाज के साथ जोडना और समाज सशक्तिकरण । सरदार पटेल ने भी विकेन्द्रित सत्ता की जगह केन्द्रित सत्ता का समर्थन किया। आश्चर्य है कि दोनो के प्रशंसक अलग-अलग गुटों मे बॅंटकर दोनो के अलग-अलग गुणगान करने मे लगे रहतें हैं। जबकि दोनो की ही वास्तविकता कुछ अलग है।
अब भी सब कुछ विध्वंस नही हुआ है, अब भी सांम्प्रदायिकता का समाधान संभव है। यद्यदि वह समस्या अब उतनी साधारण नही है जैसी गांधी हत्या के तत्काल बाद थी किन्तु समस्या चाहे जितनी विकराल हो गई हो उसका समाधान तो करना ही होगा। अब शीघ्रातिशीघ्र दो काम करने चाहिए- राष्ट्र सर्वोच्च की जगह समाज सर्वोच्च का विचार बढाने की आवश्यकता है। दूसरी आवश्यकता है कि समान नागरिक संहिता को संविधान का भाग बनाकर उसे कडाई से लागू कर दिया जाए। राष्ट्र सर्वोच्च की जगह समाज सर्वोच्च की बात का सांम्प्रदायिक हिन्दू पुरजोर विरोध करेगें। दूसरी ओर समान नागरिक संहिता का सांम्प्रदायिक मुसलमान भी पुरजोर विरोध करेंगें और यदि दोनो बातों को एक साथ लागू कर दिया जाए तो सांम्प्रदायिक तत्व अलग-थलग पड जाएंगें। मुझे तो ऐसा भी लगता है कि ऐसा कदम उठाते ही सांम्प्रदायिक हिन्दू और सांम्प्रदायिक मुसलमान एक-जुट हो जाएंगें, एक ही थाली मे बैठकर खाना-खाने लगेगें, एक साथ होकर इन विचारों का विरोध करने लगेगें और संभव है कि सांम्प्रदायिकता का कलंक भारत से मिट जाए।
अब आम आदमी को कंट्रोल करने के नाम पर केजरीवाल को दुरुस्त व्यवस्था की जरुरत महशुस होने लगी ? 
नीति और नियत ख़राब होगी तो अव्यवस्था का खोट तो नजर आएगा हीं मिस्टर केजरीवाल I 
नीतिगत फैसला लेकर के स्वराज दो स्वराज I ये बहानेबाजी और नवटंकीबाजी अब बंद होनी चाहिए I
केजरीवाल जी जिस स्वराज और व्यवस्था परिवर्तन के स्कूल के प्रोडक्ट हैं ,मैं भी उसी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ I माना हमसे सिनियर छात्र रहे हैं ,लेकिन हमारे गुरु जी ने उन्हें स्वराज और व्यवस्था परिवर्तन का पाठ पढ़ाया था न कि सत्ता हांसिल करने के लिए कोई नाजायज राह अख्तियार करने की शिक्षा दी थी I स्वराज का अर्थ होता है पॉवर का पूर्णतः अकेंद्रीयकरण ,लोकनियांत्रित तंत्र की स्थापना ,जिसके परिणाम स्वरुप नयी व्यवस्था का उदय हो I ध्यान रहे सत्ता परिवर्तन हीं व्यवस्था परिवर्तन नहीं है और ना ही अच्छा शासन देना स्वराज I हमें सुराज्य नहीं बल्कि पूर्णतः स्वराज चाहिए I मगर केजरीवाल जी रास्ता से अब भटक रहे हैं I इसलिए मैं अपने पाठशाला की गरिमा को बहाल करने के लिए उनकी गलतियों का पोल खोल रहा हूँ I हम लोग हर दृष्टि से गलत का खुलकर विरोध करेंगे और सही का खुल कर सपोर्ट करेंगे I अगर इसमे वास्तविकता है तो अरविन्द केजरीवाल जी और उनकी पार्टी की गतिविधियों पर नियंत्रण आवश्यक है I इन लिंकों से मुझे जानकारी मिली है कि आम आदमी पार्टी के लिए पाकिस्तान में चंदा कलेक्शन की जिम्मेवारी भारत के लिए मोस्ट वांटेड आतंकवादी हाफिज सईद के जिम्मे है I सचाई क्या है आप सभी पढ़िए और देश हित में इसे शेयर कीजिये I
http://covertwires.com/2013/11/17/islamists-in-pakistan-launch-online-donation-campaign-for-aam-aadmi-party/


http://www.dailypioneer.com/city/aap-accepts-funds-from-from-anti-social-elementsjanmanch.html

http://such.forumotion.com/t17581-islamists-in-pakistan-launch-online-donation-campaign-for-aam-aadmi-party

http://indianexponent.com/53967/real-source-of-aap-funds-exposed-see-detailed-report.html

http://www.niticentral.com/2013/11/21/aap-raising-funds-through-illegal-means-sting-operation-160190.html
दगाबाज केजरीवाल !!!!! पूरा लिंक पढ़िए ? 
केजरीवाल जी जिस स्वराज और व्यवस्था परिवर्तन के स्कूल के प्रोडक्ट हैं ,मैं भी उसी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ I माना हमसे सिनियर छात्र रहे हैं ,लेकिन हमारे गुरु जी ने उन्हें स्वराज और व्यवस्था परिवर्तन का पाठ पढ़ाया था न कि सत्ता हांसिल करने के लिए कोई नाजायज राह अख्तियार करने की शिक्षा दी थी I स्वराज का अर्थ होता है पॉवर का पूर्णतः अकेंद्रीयकरण ,लोकनियांत्रित तंत्र की स्थापना ,जिसके परिणाम स्वरुप नयी व्यवस्था का उदय हो I ध्यान रहे सत्ता परिवर्तन हीं व्यवस्था परिवर्तन नहीं है और ना ही अच्छा शासन देना स्वराज I हमें सुराज्य नहीं बल्कि पूर्णतः स्वराज चाहिए I मगर केजरीवाल जी रास्ता से अब भटक रहे हैं I इसलिए मैं अपने पाठशाला की गरिमा को बहाल करने के लिए उनकी गलतियों का पोल खोल रहा हूँ I हम लोग हर दृष्टि से गलत का खुलकर विरोध करेंगे और सही का खुल कर सपोर्ट करेंगे I
http://www.canarytrap.in/2013/12/15/the-security-of-aam-aadmi/
मुस्लिम आतंकवाद और हिन्दू आतंकवाद दोनों हीं देश के लिए घातक है I 
दोनों धर्मों के अति चरमपंथी हीं धार्मिक आतंकवादी हैं I
हमारा राष्ट्र गान--किसकी जय गाथा
“जन गण मन अधिनायक जय हो भारत भाग्य विधाता ” वास्तव में भारत माता या भारत वर्ष की महिमा को वर्णित नहीं करता अपितु महा कवि रवीन्द्र नाथ टैगोर ने यह गीत किंग जॉर्ज पंचम तथा इंग्लैण्ड की क्वीन के सम्मान में रचा था जिसे हम सभी लोग पिछले 65 -66 सालों से अज्ञानतावश राष्ट्र गान का मान देते हुए गाते आ रहे हैं और अब यह समय आ गया है कि हमें अपनी भूल का सुधार कर लेना चाहिये और “जन गण मन” को हटा कर “वंदे मातरम” या “सारे जहाँ से अच्छा” गीत को राष्ट्र गान के रूप में स्थापित करने के अभियान को पुरजोर समर्थन देना चाहिये I
इस गीत की रचना दिसंबर 1911 में की गयी थी ! लगभग उसी समय जब किंग जॉर्ज पंचम का राज्याभिषेक हुआ था ! यह गीत सबसे पहली बार उस समय की इन्डियन नॅशनल कोंग्रेस के अधिवेशन के दूसरे दिन 26 दिसंबर को गाया गया था !
महिला सशक्तिकरण को समर्पित !
हूँ सबल मैं 
जीत लूँगी निराशा 
प्रबल आशा !
पंथ दुर्गम
हुई राह निर्जन
साहसी मन
शास्वत सत्य - जीवन धारा !
मौन रहती
अविरल बहती
जीवन धारा !
अभी छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में हूँ 
सरगुजा की जंगलों की वादियों में बसा अंबिकापुर 
अभी यहाँ मूसलाधार बारिस हो रही है मौसम रंगीन है 
मेरा मिजाज तो रंगीन रहता हीं हैं ये ऊपर से रंगीन मौसम का मिजाज 
मेरे को सता रही है यादें ,किसी की बारम्बार याद दिला रही है 
जाड़े के ठिठुढंन का मजा कुछ और हीं है 
अकेलापन का स्वाद कुछ और हीं है
"प्रिय मिलना तू मधुमास में"

तू मेरे आँसू को समझे
मैं तेरी मुस्कान को
प्रिय मिलना तू मधुमास में

नाचने लगे सभी मन-मोर
तपन बन गयी सुखद किशोर
प्रिय मिलना तू मधुमास में

हम सीधे- सादे वचनों से नाव तना लेंगे
उस पार जाने के लिए संगिनी बना लेंगे
प्रिय मिलना तू मधुमास में

अपने प्रिय के मुखमंडल की धवलता अपनी आँखों में भर लेंगे
खिल जा कमल बन. तू मलयगिरी अधरों से तुझे लगा लेंगे
प्रिय मिलना तू मधुमास में

इन्द्र धनुस बनकर मेरे जीवन में अनुपम और तू खास हो
मेरी साँसों में बसी हुई तुम अब मेरी हीं मधुमास हो
प्रिय मिलना तू मधुमास में

चंद दही की बुँदे ,सारा दूध जमा देते है
तेरे मधुमय नयन पुलकित मन हर्षा देते हैं
प्रिय मिलना तू मधुमास में

यौवन सोलह शृंगार सजी
तू वश गई है मेरी श्वांस में
प्रिय मिलना तू मधुमास में

तू है मधु मै भवरा बनवास में
मेरी जान तू है रहती घट प्राण में
प्रिय मिलना तू मधुमास में

कंचन कलि कचनार है तू
सावन की बसंती बहार है तू
प्रिय मिलना तू मधुमास में

दूर रहकर भी आस पास है तू
मेरी भूख और प्यास है तू
प्रिय मिलना तू मधुमास में

भाग्य की सहभागी दिन रात है तू
मेरे सपनो की बारात है तू
प्रिय मिलना तू मधुमास में

विनीत
   रमेश कुमार चौबे
  मोबाइल न 08435023029