Saturday, 11 January 2014

"प्रिय मिलना तू मधुमास में"

तू मेरे आँसू को समझे
मैं तेरी मुस्कान को
प्रिय मिलना तू मधुमास में

नाचने लगे सभी मन-मोर
तपन बन गयी सुखद किशोर
प्रिय मिलना तू मधुमास में

हम सीधे- सादे वचनों से नाव तना लेंगे
उस पार जाने के लिए संगिनी बना लेंगे
प्रिय मिलना तू मधुमास में

अपने प्रिय के मुखमंडल की धवलता अपनी आँखों में भर लेंगे
खिल जा कमल बन. तू मलयगिरी अधरों से तुझे लगा लेंगे
प्रिय मिलना तू मधुमास में

इन्द्र धनुस बनकर मेरे जीवन में अनुपम और तू खास हो
मेरी साँसों में बसी हुई तुम अब मेरी हीं मधुमास हो
प्रिय मिलना तू मधुमास में

चंद दही की बुँदे ,सारा दूध जमा देते है
तेरे मधुमय नयन पुलकित मन हर्षा देते हैं
प्रिय मिलना तू मधुमास में

यौवन सोलह शृंगार सजी
तू वश गई है मेरी श्वांस में
प्रिय मिलना तू मधुमास में

तू है मधु मै भवरा बनवास में
मेरी जान तू है रहती घट प्राण में
प्रिय मिलना तू मधुमास में

कंचन कलि कचनार है तू
सावन की बसंती बहार है तू
प्रिय मिलना तू मधुमास में

दूर रहकर भी आस पास है तू
मेरी भूख और प्यास है तू
प्रिय मिलना तू मधुमास में

भाग्य की सहभागी दिन रात है तू
मेरे सपनो की बारात है तू
प्रिय मिलना तू मधुमास में

विनीत
   रमेश कुमार चौबे
  मोबाइल न 08435023029

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