अभी छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में हूँ
सरगुजा की जंगलों की वादियों में बसा अंबिकापुर
अभी यहाँ मूसलाधार बारिस हो रही है मौसम रंगीन है
मेरा मिजाज तो रंगीन रहता हीं हैं ये ऊपर से रंगीन मौसम का मिजाज
मेरे को सता रही है यादें ,किसी की बारम्बार याद दिला रही है
जाड़े के ठिठुढंन का मजा कुछ और हीं है
अकेलापन का स्वाद कुछ और हीं है
सरगुजा की जंगलों की वादियों में बसा अंबिकापुर
अभी यहाँ मूसलाधार बारिस हो रही है मौसम रंगीन है
मेरा मिजाज तो रंगीन रहता हीं हैं ये ऊपर से रंगीन मौसम का मिजाज
मेरे को सता रही है यादें ,किसी की बारम्बार याद दिला रही है
जाड़े के ठिठुढंन का मजा कुछ और हीं है
अकेलापन का स्वाद कुछ और हीं है
No comments:
Post a Comment