Friday, 17 May 2013

कोल माफिया से लुटता छत्तीसगढ़


कोल माफिया से लुटता छत्तीसगढ़

बड़े-बड़े सफेदपोश शामिल  हैं छत्तीसगढ़ की कोल ब्लाक को लूटने में I छत्तीसगढ़ के संसाधनों पर डाका डालने वाले माफिया लम्बे समय से कोयले पर भी लूट मचाए हैं इस बात की जानकारी लगातार सामने आ रही है। चिन्ताजनक यह है कि प्रभावी एवं अन्दर तक पहँुच रखने वाले सफेदपोश भी कोयले में हाथ काला किए बैठे हैं। बताते हैं कि चूंकि सत्ता के गलियारे में उनकी तुती बोलती है, इसलिए चाहकर भी प्रशासन चूँ तक नहीं कर सकता। हद तो यह होती है कि कोल माफिया से जुड़े लोग नेता बन गए हैं जो रात के अन्धेर में कोयला पार करने की गणित सेट करते हैं और दिन के उजाले में चकाचक कुर्ता-पायजामा पहन उस पर गर्म जैकेट डाल राजनीति झड़ते हैं। कहते हैं कि शासन प्रशासन पर उनका रौब दाव चलता है। यदि नजर दौड़ाएँ तो बिलासपुर से लेकर रायगढ़, नेला जांजगीर,कोरण आदि का इलाका कोयले से समृद्ध हैं। वहाँ के लोग बताते हैं कि यहाँ की धरती को थोड़ा खोदो तो कोयला दिखने लगता है। इस क्षेत्र में कोल की खानें हैं। इस इलाके की धरती के नीचे कोयले को देखकर उद्योगपति आकृष्ट हुए है। रायगढ़ से लेकर उस क्षेत्र में ही प्लांट धड़ाधड़ लग रहे हैं। इन प्लान्ट्स के संचालन में कोल का ही अह्म रोल होता है। चूँकि आस-पास की धरती कोयले से भरी है सो कोल आपूर्ति में दिक्कत नहीं आती। इसी का फायदा यहाँ उद्योग लगाने वाले संस्थान उठाते हैं। वे बाकायदा टीम बनाकर के  खानों से कोयला उत्खनन कर निकालते हैं। इसके लिए किसी प्रकार का सरकारी परमिशन नहीं होता। कहते हैं कि सेटिंग करके बड़े पैमाने पर कोयला चोरी की जाती है। बिना अनुज्ञप्ति एवं सरकार की अनुमति के कोल खपने से कई नुकशान हो रहे हैं। सबसे पहले तो राज्य शासन के राजस्व को बड़ी आर्थिक क्षति हो रही है, दूसरे छत्तीसगढ़ की धरती की कोल सम्पदा लूट रही है, तीसरे माफिया फैलकर क्षेत्र को अशान्त कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह कि प्रशासन के अधिकारी पंगु बन गए हैं जो किसी भी लिहाज से उचित नहीं है। शासकीय अधिकारी कहते हैं कि किसी बेचारे से कम नहीं हैं वे गाड़ी-बंगला चाहे बना लें किन्तु उनका ईमान उन्हें भीतर-ही-भीतर तोड़ता होगा। कोई भी सोचता है कि रायगढ़ नैला-जांजगीर,कोरबा आदि क्षेत्रों में इनते व्यापक पैमाने पर उद्योग क्यों लग रहे हैं लेकिन वे नहीं जानते कि यह क्षेत्र कोल की दृष्टि से समृद्ध है इसलिए इस क्षेत्र में उद्योग स्थापित हो रहे हैं। दुर्भाग्य यह है कि छत्तीसगढ़ के इन इलाके से कोल सम्पदा लूटी जा रही है और हम हैं कि चूप? आखिर कब तक हमारे प्रदेश में यह लूटमार मची रहेगी? अभी कुछ ही दिनों पूर्व रायगढ़ क्षेत्र में बिना ट्रांजिट पास के किसी उद्योग में कोल आपूर्ति का एक बड़ा माकला सामने आया। एसडीएम की अगुबाई में खनिज विभाग वालों ने जामगाँव के उद्योग में जांच की तो एक नहीं नौ ट्रक कोयला पकड़ा गया जो बिना किसी कागजात का था। खनिज टॉयल्टी चोरी के इस बड़े मामले में कई खुलासे हुए। वहाँ कलेक्टर अमित कटारिया बताते हुए इन सब मामलों में बेहद सख्त हो गए थे। इसी प्रकार से रायगढ़ क्षेत्र में ही 3 बजे रात में पुलिस टीम ने चोड़ीगुड़ा के पास टे्रक्टर में कोल चोरी करते लोगों को पकड़ा। पुलिस को देखकर चोर भाग खड़े हुए। बताते है कि कोल माफिया का नेटवर्क तगड़ा एवं फैला हुआ है। इस काम में बाहर से बुलाकर दबंग किस्म के लोगों को लगाया गया है। कोल प्वाइंट बनाकर तश्करी की जा रही है। चूँकि यह काम पूरी चैन बनाकर की जाती हैं इसलिए बहुत जल्दी कार्यवाही नहीं हो पाती। व्यूह रचना करके कोयला निकाला जाता है। इस मामले में चिन्तनीय है कि सैकड़ो ट्रक्स,टे्रक्टर एवं अन्य वाहन कोल के अवैध परिवहन में वेधड़क लगे हुए हैं फिर भी उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाता। आखिर कब तक दिखावे की कार्यवाही की जाती रहेगी? जानकार सूत्रों के मुताबिक कोल माफिया के तार भिलाई-दुर्ग एवं राजनांदगांव से भी जुड़े हैं, जो जानकारी मिली हे उससे चौकांने वाली बात यह है कि राजधानी रायपुर में कोल माफिया के सूत्रधार रहता है जो सत्ताधीशों एवं राजनीतिज्ञों के साथ उच्च प्रशासनिक हल्कों में गोटी सेट रखता है। कोल तस्करी के काम बताते हैं कि कोल माइन्स से जुड़े लोग की मदद करते हैं। यहाँ तक जानकारी मिली है कि दिल्ली से लेकर हरियाणा तक रकम बँटती है। कोल ब्लॉकों तक से जो माल निकलता है उस तक में गड़बड़ी की शिकायतें हैं।

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