Friday, 17 May 2013

देश की राजनितिक पार्टीयो का लोकतंत्र कहा है?


 देश की राजनितिक पार्टीयो का लोकतंत्र कहा है?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है लेकिन ये इतनी हास्यास्पद बात है कि हमारे देश के लगभग सारे राजनीतिक पार्टीयो में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है। चाहे वो वर्तमान में केंद्र की सरकार चला रही कांग्रेस पार्टी हो या मुख्य विपक्षी दल भाजपा, कही भी लोकतांत्रिक ढंग से न पार्टी अध्यक्ष बनाये जाते है न ही विधायक या सांसद का टिकट दिया जाता है। हाल के घटनाक्रम में हम सबने देखा की कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गाँधी को बनाया गया। न कोई दूसरा उमीदवार था न कोई वोटर था। उसी तरह भाजपा के अध्यक्ष के चुनाव में भी सारे प्रस्तावको से खाली प्रस्तावना पत्र पर हस्ताक्षर कर के माँग लिया गया। ये लोकतान्त्रिक तरीके से चुनाव का मजाक मात्र नही तो और क्या है? हमारे देश की सारी राजनीतिक पार्टीया कहती है – हमारा देश के लोकतंत्र में विश्वास है लेकिन उनकी पार्टी में ही लोकतंत्र नही है। राहुल गाँधी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पार्टी बनाती है इसके लिए न कोई चुनाव की तारीख की घोशणा होती है न नामांकन दाखील करने की। और हम कहते है की हम एक लोकतांत्रिक ब्यवस्था में रहते है। देश के किसी भी राज्य में चुने हुए विधायक से नही पूछा जाता की मुख्यमंत्री कौन होगा और पार्टी आलाकमान के आदेश पर मुख्यमंत्री चुना जाता है। लोकतंत्र का दंभ भरने वाली राजनीतिक पार्टिया जबतक अपने पार्टी के अंदर लोकतंत्र की बहाली नही करती तब तक देश के राजनीती पर कुछ वंश या परिवारो का कब्ज़ा होकर रह जायेगा। जो की इस देश के लिए सही नही है और न ही लोकतान्त्रिक प्रक्रिया लिए। लेकिन ये तब तक नही बदलेगा जबतक इस देश का आम आदमी इसके खीलाफ नही उठेगा। देश की राजनितिक पार्टीयो का लोकतंत्र कहा है

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