Friday, 24 May 2013

संसद और न्यायलय की अवमानना का मुक़दमा जनता पर चलाना किसी भी हालत में किसी भी तरह से न्याय संगत हो हीं नहीं सकता है I अवमानना शब्द को शाब्दिक रूप से परिभाषित करने की जरुरत है I हमारे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता , जो हमें नैसर्गिक रूप से मिले हैं ,संविधान कौन होता है उस पर अंकुश लगाने वाला ? मौलिक अधिकार इश्वर प्रदत्त होता है I संविधान कौन होता है यह देने वाला ? प्रकृति ने हमें जो जन्म से दिया है उसे अपना खैरात कहने वाला संविधान हीं अपने आप में गलत और दोष पूर्ण है I

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