Thursday, 16 May 2013

जब खुलकर दिल की बातें कहने का बिचार होता है

जब खुलकर दिल की बातें कहने का बिचार होता है. जब अपनी भावनावों का तन्हाई से श्रृंगार होता है. तब एक नयी कविता का आगाज होता है.......... -: रमेश कुमार चौबे 
हर कोई हर दिल का हमराज नहीं होता.
सब के सर पे उल्फत का ताज नहीं होता.
मेरी तन्हाई कहती है अब मान भी जाओ,
अपनों से भला कोई यूँ नाराज नहीं होता.
शिकवे-गिले जताते है अपनापन है कितना,
इनके बिना तो प्यार का आगाज नहीं होता.
फासलों में सिमटी है मिलने की मीठी चाहत,
नहीं कोई रूठता,तो मनाने का रिवाज नहीं होता.

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