जरा सोंचो जब मंदीर का पुजाड़ी मंदिर में मांस मदिरा का सेवन करने लगे और मस्जिद का मुल्ला भी जब मस्जिद में शराब शबाब का सेवन करने लगे और गिरिजा घर का फादर गिरिजा घर को ऐयासी का अड्डा बना दे तो उन धर्मो के धर्मावलम्बी क्या करेंगे ? उसी तरह लोक तंत्र के मंदीर संसद भवन में जब हमारे चुने गए लोक सेवक अपने को मालिक और जनता को नौकर समझने लगे तो हमें क्या करना चाहिए I चुप्पी तोड़ो ऐसा तमाचा उन जालिमों के गा्ल पर मारो की ताजींदगी वे आपकी चमचा को याद रखे और यह तमाचा है सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि व्यवस्था परिवर्तन I
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