Sunday, 19 May 2013

छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा योजना में भारी भ्रष्टाचार

छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा योजना में भारी भ्रष्टाचार 
भूख और गरीबी मिटाओ का नारा देकर छत्तीसगढ़ में चलाई जा रही खाद्य सुरक्षा योजना में भारी भ्रष्टाचार और घोर अनियमितता का नजारा खुलेआम देखा जा सकता है I गरीबों को मुफ्त में या सस्ते दर पर मिलने वाला राशन प्रशासन ,सफेदपोसों , सत्ताधारी दल के कार्यकर्तायों और जनवितरण प्रणाली के संचालकों की मिली भगत से खुले बाजार में बिकता है I बीपीएल और एपीएल के नाम पर सुराज्य का नारा देने वाली रमण सरकार में भ्रष्टाचार का बोल बाला सर्व विदित है I चाउर वाले बाबा की मंडली लूट तंत्र में पूर्ण रूपेर्ण भागीदार है I
छत्तीसगढ़ राज्य में दिखावे के तौर पर जो पैमाना तय किया गया है उसमें बड़े भूस्वामियों जो कि कर दाता हैं, उन्हें छोड़कर सभी को खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल किया गया है। इसके कारण छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा से 90 प्रतिशत लोग आच्छदित हो गए हैं I जिसके परिणाम स्वरुप घोर अनियमितता और गरीबों को मुफ्त में या सस्ते दर पर मिलने वाला राशन प्रशासन ,सफेदपोसों , सत्ताधारी दल के कार्यकर्तायों और जनवितरण प्रणाली के संचालकों की मिली भगत से खुले बाजार में बिकता है I छत्तीसगढ़ में एक रुपए प्रति किलोग्राम की दर से प्रति परिवार प्रति माह 60 किलोग्राम अनाज दिया जा रहा है I पांच रुपये प्रति किलोग्राम की दर से प्रति परिवार प्रति माह दो किलोग्राम चना दिया जा रहा है I पच्चास पैसे प्रति किलोग्राम की दर से प्रति परिवार प्रति माह दो किलोग्राम नमक दिया जा रहा है I तेरह रुपये प्रति किलोग्राम चीनी और केरोसिन तेल दिए जा रहे हैं I आप सोंच सकतें हैं जरुरत मंदों के नाम पर सुराज्य के नारा देने वाली सरकार कितना बड़ा भ्रष्टाचार का नेटवर्क तैयार की है I अगर ये सुराज्य हीं लाना चाहते हैं तो क्यों न ये उपभोक्ताओं को कैश सब्सिडी के रूप में उन तक मूल्य राशि बैंक खाता के जरिये पहुंचाते हैं ?

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