Thursday, 16 May 2013

मेरे विचार से धर्म किसी भी व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है I यह किसी द्वारा किसी पर थोपना एक बर्बर कृत्य है I हम वैदिक कर्मकांड को स्वीकार करते हैं परन्तु हम इसके पाखंड की घोर निंदा करते हैं I हम देश की अखंडता के लिए सामान नागरिक संहिता को अति आवश्यक मानते हैं I इससे समाज में विभिन्न धर्मों का हत्क्षेप स्वतः समाप्त हो जायेगा I सभी धर्मों का सभी को ज्ञान हो एतदर्थ प्राथमिक शिक्षा में इसका समावेश होना चाहिए I मेरा मानना है भविष्य में तभी धार्मिक दृष्टि से देश एक बना रह सकता है I

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