रमन राज में धन-धरती की अफरा-तफरी का कीर्तिमान छत्तीसगढ़ में डॉ रमण सिंह के राज में धन-धरती की लूटखसोट की नीति छत्तीसगढ़ के भविष्य के लिए घातक है I गत नौ वर्षों के भाजपा शासित रमन सरकार में भ्रष्ट कर्मियों एवं लालची मंत्रियों ने धन-धरती की अफरातफरी में एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया है। किसी भी भ्रष्ट को किसी तरह का कोई भय पकड़े जाने का नहीं है। धड़ल्ले से घपले घोटालों को अंजाम दिया जा रहा है। रमन सरकार में कोई भी सौदा बिना कमीशन लिए नहीं होता है। प्रदेश के हर क्षेत्र में लूट खसोट का बाजार गरम है। छत्तीसगढ़ की जनता के हक की दौलत को सरकार द्वारा लुटाया जा रहा है I प्रदेश की बची खुची साख व सम्पदा को यदि बचाना है तो रमन सरकार को उखाड़ फेंकना आवश्यक है।
नम्बर दो की काली कमाई का यह आलम है कि उसे कहां खर्च करें, उसकी समस्या भ्रष्टाचारियों के समक्ष उत्पन्न हो जाती है और यह काला धन का ही कमाल है कि बाहर से अय्याशी की प्यास बुझाने कालगर्ल्स लाखों रूपये खर्च कर बुलाई जाती है। यह सब अफरात काला धन का कमाल है जो रमन राज में आसानी से उपलब्ध होता है। इस लत के शिकार अय्याश अकसर पकड़े जाने के भय से विदेशों में जाकर अपना शौक पूरा करते हैं ताकि प्रदेशवासियों की नजरों में साफ सुथरे बने रह सके। पहले के शासन में जिस्मफरोशी के धंधेबाजों में प्रशासन एवं पुलिस का भय था जो आज नजर नहीं आता है तथा अपराधों में बढ़ोतरी वर्तमान सरकार की लचर कानून व्यवस्था की देन है। प्रदेश के मुख्यमंत्री को बिगड़ती कानून व्यवस्था की कोई चिन्ता नहीं है क्योंकि मुख्यमंत्री जी को आसन्न चुनाव में सत्ता जाने का पूर्वाभास हो चुका है। उन्होंने इसीलिए सभी भाजपा कार्यकर्ता, नेताओं तथा मंत्रियों को खुलमखुला फर्रूखाबादी खेल खेलने की छूट दे रखी है।
सीबीआई, आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो जैसी जांच एजेन्सियों द्वारा छापामारी में सब इंजीनियर से लेकर उच्च अधिकारियों के घरों से करोड़ों की चल-अचल संपत्ति के प्रकरण उजागर हो रहे हैं। इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि जब भ्रष्ट कर्मचारियों के पास करोड़ों की सम्पत्ति है तो रमन सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों के पास अरबों रूपये की अघोषित सम्पत्ति एवं काला धन होना लाजमी है। रमन सरकार ने सत्ता को व्यापार का स्वरूप दे दिया है तथा सत्ताधारियों पर केवल स्वार्थ का भूत सवार है। प्रदेश की जनता की दयनीय हालत की उसे जरा भी चिंता नहीं है परन्तु खेद एवं आश्चर्य का विषय है कि रमन सरकार में कर्मचारियों के घरों पर तो छापे पड़ते हैं परन्तु किसी मंत्री या धनाढय भाजपाई नेता के घर पर छापे क्यों नहीं पड़ते? जब भ्रष्ट कर्मचारी करोड़पति हैं तो भ्रष्ट मंत्री का अरबपति होना तय है। यह है रमन सरकार के भ्रष्टाचार का खुलासा जो सत्ता के दुरूपयोग की पराकाष्ठा है।
नम्बर दो की काली कमाई का यह आलम है कि उसे कहां खर्च करें, उसकी समस्या भ्रष्टाचारियों के समक्ष उत्पन्न हो जाती है और यह काला धन का ही कमाल है कि बाहर से अय्याशी की प्यास बुझाने कालगर्ल्स लाखों रूपये खर्च कर बुलाई जाती है। यह सब अफरात काला धन का कमाल है जो रमन राज में आसानी से उपलब्ध होता है। इस लत के शिकार अय्याश अकसर पकड़े जाने के भय से विदेशों में जाकर अपना शौक पूरा करते हैं ताकि प्रदेशवासियों की नजरों में साफ सुथरे बने रह सके। पहले के शासन में जिस्मफरोशी के धंधेबाजों में प्रशासन एवं पुलिस का भय था जो आज नजर नहीं आता है तथा अपराधों में बढ़ोतरी वर्तमान सरकार की लचर कानून व्यवस्था की देन है। प्रदेश के मुख्यमंत्री को बिगड़ती कानून व्यवस्था की कोई चिन्ता नहीं है क्योंकि मुख्यमंत्री जी को आसन्न चुनाव में सत्ता जाने का पूर्वाभास हो चुका है। उन्होंने इसीलिए सभी भाजपा कार्यकर्ता, नेताओं तथा मंत्रियों को खुलमखुला फर्रूखाबादी खेल खेलने की छूट दे रखी है।
सीबीआई, आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो जैसी जांच एजेन्सियों द्वारा छापामारी में सब इंजीनियर से लेकर उच्च अधिकारियों के घरों से करोड़ों की चल-अचल संपत्ति के प्रकरण उजागर हो रहे हैं। इससे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि जब भ्रष्ट कर्मचारियों के पास करोड़ों की सम्पत्ति है तो रमन सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों के पास अरबों रूपये की अघोषित सम्पत्ति एवं काला धन होना लाजमी है। रमन सरकार ने सत्ता को व्यापार का स्वरूप दे दिया है तथा सत्ताधारियों पर केवल स्वार्थ का भूत सवार है। प्रदेश की जनता की दयनीय हालत की उसे जरा भी चिंता नहीं है परन्तु खेद एवं आश्चर्य का विषय है कि रमन सरकार में कर्मचारियों के घरों पर तो छापे पड़ते हैं परन्तु किसी मंत्री या धनाढय भाजपाई नेता के घर पर छापे क्यों नहीं पड़ते? जब भ्रष्ट कर्मचारी करोड़पति हैं तो भ्रष्ट मंत्री का अरबपति होना तय है। यह है रमन सरकार के भ्रष्टाचार का खुलासा जो सत्ता के दुरूपयोग की पराकाष्ठा है।
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